ей жизни прошло, разум потух, осталось лишь одно сияние. Ушла твоя известность, осталось одно мгновение…
Твое время прошло, есть ли у тебя место, помимо могилы? О бедняга! Есть ли какой-нибудь предел твоему бессилию и бедности? Твои чаяния и желания бесконечны, а смертный час близок. Да, что же будет с человеком, находящимся в такой бедности и бессилии и лишенным воли и сил? С этим бессилием нужно довериться Милостивому и Милосердному Творцу, обладателю сокровищниц Милости, и положиться на Него. Он – опора для каждого. Он – Тот, к Кому обращаются за помощью все слабые и нуждающиеся…
دَٓائِرَهءِ اِحْتِيَاجْ مَانَنْدِ دَٓائِرَهءِ مَدِّ نَظَرْ بُزُرْگ۪ى دَارَسْتْ
خَيَالْ كُدَامْ رَسَدْ اِحْتِيَاجْ ن۪يزْ رَسَدْ دَرْ دَسْتْ
هَرْچِه ن۪يسْتْ دَرْ اِحْتِيَاجْ هَسْتْ
دَٓائِرَهءِ اِقْتِدَارْ هَمْچُو دَٓائِرَهءِ دَسْتِ كُوتَاهْ كُوتَاهَسْتْ
پَسْ فَقْر و حَاجَاتِ مَا بَقَدْرِ جِهَانَسْتْ
وَ سَرْمَايَهءِ مَا هَمْ چُو جُزْءِ لاَيَتَجَزَّا اَسْتْ
ا۪ينْ جُزْءْ كُدَامْ وَ ا۪ينْ كَٓائِنَاتِ حَاجَاتْ كُدَامَسْتْ
پَسْ دَرْ رَاهِ تُو َازْ ا۪ينْ جُزْءْ ن۪يزْ بَازْ م۪ى گُذَشْتَنْ چَارَهءِ مَنْ اَسْتْ
تَا عِنَايَتِ تُو دَسْتْگ۪يرِ مَنْ شَوَدْ رَحْمَتِ ب۪ى نِهَايَتِ تُو پَنَاهِ مَنْ اَسْتْ
آنْ كَسْ كِه بَحْرِ ب۪ى نِهَايَتِ رَحْمَتْ يَافْتْ اَسْتْ
تَكْيَه نَه كُنَدْ بَرْ ا۪ينْ جُزْءِ اِخْتِيَارِى كِه يَكْ قَطْرَه سَرَابَسْتْ
اَيْوَاهْ ا۪ينْ زِنْدِگَان۪ى هَمْ چُو خَابَسْتْ
و۪ينْ عُمْرِ ب۪ى بُنْيَادْ هَمْ چُو بَادَسْتْ
اِنْسَانْ بَزَوَالْ دُنْيَا بَفَنَا اَسْتْ آمَالْ ب۪ى بَقَا آلاَمْ بَبَقَا اَسْتْ
بِيَا اَىْ نَفْسِ نَافَرْجَامْ وُجُودِ فَانِى ىِ خُودْرَا فَدَا كُنْ
خَالِقِ خُودْرَا كِه ا۪ينْ هَسْت۪ى وَد۪يعَه هَسْتْ
وَ مُلْكِ اُو وَ اُو دَادَه فَنَا كُنْ تَا بَقَا يَابَدْ اَزْ آنْ
سِرّ۪ى كِه ، نَفْىِ نَفْىْ اِثْبَاتْ اَسْتْ
خُدَاىِ پُرْكَرَمْ خُودْ مُلْكِ خُودْرَا مِى خَرَدْ اَزْ تُو
بَهَاىِ ب۪ى گِرَانْ دَادَه بَرَاىِ تُو نِگَاهْ دَارَسْتْ
